Monday, September 06, 2004

नाद बनाम नाद्कारी

नाद के बारे मेँ .......

ना शोर शराबा ..... ना उद्घोषणा....

कुछ स्वर उनके जो कहते हैं बात करते हैं कि बदलाव के रास्ते खुलेँ....

2 comments:

masijeevi said...

अगर इस पोस्‍ट की तिथि के हिसाब से देखें तो आप कुछ सबसे पुराने ब्‍लॉगरों में से हैं।

Anupam Pachauri said...

ह्म्म...सो तो है।