ज़माना हुआ ब्लॉग पर कुछ उकेरा नहीँ। नाद्कारी का वक़्त फिर आ गया है। एक नये किस्म का ब्लॉग शुरु करने की मंशा कई दिनोँ से मन मेँ पनप रही है। इसी बीच नाद के कई साथियोँ ने याद दिलाया कि भैया नया तो ठीक है लेकिन जो कुछ साल पहले भुला बैठे हो उस पर भी कुछ तवज्जो दो। सो हम हाजिर हो गये हैं।
और इस दौरान न जाने कितना पानी जमुना से गायब हो गया है।
अनुपम पचौरी
anupam pachauri
Sunday, March 11, 2007
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2 comments:
आपका स्वागत है। आपसे अनुरोध हे कि नारद पर पंजीकृत हो जाएं ताकि हमें पता लगता रहे कि कब आपने कुछ अद्यतन लिखा है।
यूँ तो अलग से पोस्ट भी लिखी है लेकिन टिप्पणी अलैदा दर्ज कर रहे हैँ कि सनद रहे-नारद पर दर्ज न होने क निर्णय सोच समझ कर, नाद के हित मेँ लिया गया है।
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